How many types of Kriya Mantra Yoga in hindi | मंत्र क्रिया योग कितने प्रकार

Kriya Yoga Meditation Mantra:मन्त्रों के लगातार बोलने की क्रिया को जप कहा जाता है। आज इस लेख के माध्यम से जाने की How many types of Kriya Mantra Yoga in hindi इन मंत्रों के बोलने से एक खास तरह का उतार-चढ़ाव होता है। इस प्रक्रिया से साधक की सोई हुई चेतना को जगाया जाता है। साधक मंत्रों की साधना जब तक करते समय उसकी उच्चारण ध्वनि निकलती हुई प्रतीत होती है परंतु जब वह मानसिक रूप से होने लगता है तो इस साधना सर्वोच्च रूप में परिवर्तित हो जाती है।

मंत्र क्रिया योग के माध्यम से हमारे देह के अंदर नाद का स्वर पैदा होता है। यह अनहद नाद होता है।

क्रिया योग: Kriya Yoga In Hindi

असल में साधना की चरम स्तर ब्रह्मांड के शब्दों के साथ एकरूपता स्थापित करना और इस कारण से साधक ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने में योग्य सिद्ध हो जाता है। आइए आगे जाने की क्रिया मंत्र योग (Kriya Mantra Yoga)  के कितने प्रकार होते हैं।

क्रिया योग मंत्रदोस्तों क्रिया योग क्या होता है इसे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आज हम आपको क्रिया योग मंत्र के प्रकार के प्रयोग के बारे में बताएंगे। पिछले लेख में हमने क्रिया योग-मंत्र और क्रिया- योग के बारे में बताया है। इस आर्टिकल में क्रिया योग मंत्र के प्रयोग  और प्रकार के बारे में जानकारी दे रहे हैं। मंत्र किस तरह से प्रयोग किया जाता है, इस पर चर्चा करेंगे। आपको यहाँ पर कुछ Baba Ram Dev यूट्यूब वीडियो लिंक भी दिए जा रहे हैं, जिससे कि आप इन्हें देखकर क्रिया  योग मंत्र का अभ्यास कर सकते हैं। 

 साधक जब इस साधना के ब्रह्मांड शब्दों (ध्वनि) से खुद को जोड़ लेता है तो साधक सृष्टि के रहस्यों को जानने लगता है। 

दोस्तों क्रिया मंत्र योग (Kriya Mantra Yoga) में जब मंत्र मन के अंदर से स्वयं ही उपचारित होने लगता है तो यह स्थिति समाधि की स्थिति कहलाती है। इस स्थिति में साधक ब्रह्मांड की चेतना से जुड़ने लगता है। मंत्र योग की जीत साधना के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पहले जानना चाहिए कि क्रिया मंत्र योग (Kriya Mantra Yoga)  कितने प्रकार का होता है।

 How many types of Kriya Mantra Yoga in hindi मंत्र क्रिया योग कितने प्रकार 

मन बड़ा ही चंचल होता है उसका मन केवल मनोरंजन इत्यादि में ही लगता है। इसलिए जब मन को मंत्रों के माध्यम से एकत्र किया जाता है तो मंत्र क्रिया योग कहलाता है। आइए जानें मंत्र क्रिया योग के प्रकार के बारे में-

जैसा कि आपको मालूम है कि मंत्र एक ऐसी ध्वनि है जिसके लगातार उच्चारण मात्र से मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है क्योंकि जो मंत्र जिससे शक्तिपुंज को लिए होता है उसे वह प्रकाशमान बनाती है।

मंत्र जप के प्रकार हैं-
सार्वभौमिकयह मंत्र कोई भी व्यक्ति कर सकता है। यह व्यक्तिगत मंत्र विशेष परिस्थितियों के लिए बनाए गए है। इस मंत्र का उच्चारण सभी सुन सकते हैं।
उपांशुइस मंत्र में ध्वनि स्पष्ट सुनाई नहीं देती फुसफुसाहट ध्वनि निकलती है। शारीरिक क्रियाओं की संचालन इसमें होता है।
पश्यंतिसहज मानसिक आवृत्ति के साथ या मंत्र क्या होता है।  श्वांश  के साथ या माला फेरने के साथ  इस मंत्र को किया जाता है। 
पराइस मंत्र प्रकार में स्वयं ही मानसिक क्रियाकलाप द्वारा मंत्र का उच्चारण मन में स्वतः ही होता है

आइए जाने की मंत्र योग्य जब साधना किस तरह से किया जाता है- 

1. नित्य 

सुबह और शाम को गुरु द्वारा दिए गए मंत्र का नित्य जाप करना किसके अंतर्गत आता है। 

2. नैमित्त

किसी विशेष पूजा पाठ आध्यात्मिक मुहूर्त के समय उसी ने नैमित्त मंत्र  क्रिया योग किया जाने वाला मंत्र जाप या कहलाता है जैसे दीपावली में लक्ष्मी पूजन के समय। 

3. काम्य

विशेष मंत्र जब मन में कोई काम ना हो इच्छा हो कुछ पाने के लिए तो इस मंत्र का विशेष तौर पर  क्रिया किया जाता है। 

4. निषिद्ध 

  गलत तरीके से मंत्रों का उच्चारण करके  मंत्र करना या अनजाने में किसी तरह से इस तरह का जप करना जो  अनाधिकृत है निशब्द मंत्र कहलाता है। 

5. प्रायश्चित जप 

 किसी कार्य के प्रायश्चित  (भूल या गलती के कारण हुए पछतावा) के कारण किया जाने वाला जप प्रायश्चित जप कहलाता है। इसका भी एक अलग विधान है, जिसके अनुसार जप किया जाता है।

6. अचल 

इस क्रिया योग में बिना हिले यानी स्थिर होकर बैठकर किए जाने वाले मंत्र  क्रिया योग अचल जप कहा जाता है। साधक पूरी दृढ़ इच्छाशक्ति से अपने आसन पर बैठकर मंत्र उच्चारण करता है।

7. चल

जब साधक चलते-चलते या खड़े होकर या कोई काम करते हुए मंत्र का उच्चारण करता है तो यह चल  जप  कहलाता है।

8. वाचिका 

जिस जप को बार-बार  ऊंची आवाज (ध्वनि) में किया जाता है, उसे वाचिका-जप कहते हैं।

9. उपांशु

इस पद्धति में मंत्र  योग क्रिया करने पर होठों से बुदबुदा कर मन्त्र का जप किया जाता है, किसे उपांशु  क्रिया मंत्र योग (Kriya Mantra Yoga) कहते हैं।

10. मनस्त 

इस क्रिया मंत्र योग (Kriya Mantra Yoga) में मन के माध्यम से  मानसिक  मंत्र क्रिया योग किया जाता है ।  मन के अंदर  मंत्र जप चलता है,  जिसकी ध्वनि बाहर सुनाई नहीं देती है।  साधक जब अपनी आंखें बंद कर लेता है तो मन की गहराइयों में उतर कर इस मंत्र  क्रिया योग का जाप करता है तो उसके अंदर के भटकाने वाले विचार दब जाते हैं,  और मंत्र का भाव उभर कर आता है। 

11. अखण्ड जप 

लगातार मंत्रों का उच्चारण अखंड क्रिया मंत्र योग (Kriya Mantra Yoga) योग जाप कहलाता है। लगातार मंत्र जाप की प्रक्रिया चलती रहती है। इसके लिए समय निश्चित कर लिए जाते हैं और लगातार इस समय के बीच मंत्रों का उच्चारण होता है। 

12. अजपा 

मन्त्र के अर्थ को मन में आत्मसात् करते हुए उसमें लय हो  जाने की प्रक्रिया कोअजपा जप कहते हैं।

13. प्रदक्षिणा

किसी मंदिर या पवित्र स्थान के चारों को चक्कर लगाते हुए जब करना प्रदक्षिणा जब कहलाता है। 

नोट सभी प्रकार के मंत्रों के जप क्रियायोग मन में एकाग्रता लाकर ध्यान केंद्रित करके किया जाना चाहिए। बिना गुरु के सहायता से मंत्र उच्चारण नहीं करना चाहिए एक बार गुरु की आज्ञा लेकर और उनसे सीख कर मंत्र उच्चारण करना चाहिए। 

मंत्र क्रिया योग में मंत्रों की शक्ति अपना  सूक्ष्म प्रभाव डालती है।  मंत्र योग क्रिया में कई तरीके से मंत्र का जप किया जाता है अंततः आत्म चेतना मिले हो जाने का प्रयास किया जाता है और इस उपलब्धि  से साधक को दिव्यता की प्राप्ति होती है। 

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