कितने घंटे सोना चाहिए/ कैसे सोना चाहिए: बाईं या दाईं करवट

अक्सर पूछा जाता है कि कितने घंटे सोना चाहिए कि हम तरोताजा महसूस करें। यह सवाल हमेशा पूछा जाता है कि कितने घंटे नींद लेने से हमारी थकान मिट जाती है इन्हीं सब सवालों के जवाब अध्ययन के जरिए से यहां पर दिया जा रहा है कि सोने या नींद का क्या मतलब होता है। कितना समय हमें सोना (sleeping) चाहिए‌। कैसे सोना चाहिए, बाईं या दाईं करवट …

इस पर चर्चा किया जा रहा है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि  मनुष्य को किस दिशा में सोना चाहिए /उत्तर दिशा में सिर करके क्यों नहीं सोना चाहिए। क्लिक करके जानें। 

नींद आराम है तो कितनी नींद जरूरी है

अच्छी और भरपूर नींद कितने घंटे की हो। नींद क्या आराम होता है इन सब बातों को जाने के लिए अब आप से हम बात करेंगे। सवाल घूम फिर कर यही आता है कि नींद आराम है तो फिर नींद कितना जरूरी है। आपके लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है कि आप कितने घंटे में सोकर तरोताजा होते हैं। 

कितनी देर सोना चाहिए

हर इंसान की लाइफ स्टाइल, शारीरिक बनावट और उसके काम करने के तरीके आदि पर निर्भर करता है कि वह कितने घंटे में तरोताजा होकर हो सकता है। इसलिए हर मामले में कितनी देर सोना चाहिए अलग अलग हो सकता है। लेकिन यह तय है कि हमें कम से कम सोना चाहिए और अधिक से अधिक जागना चाहिए। जागेंगे तो बेहतर काम करेंगे। हमारा जन्म काम करने के लिए ही हुआ है। इसलिए काम करते-करते शरीर को आराम काम करते हुए देना ऐसा ख्याल कैसा होगा।

शरीर को नींद चाहिए कि आराम

तो आप आप बताइए कि शरीर सोना या नींद नींद चाहता है या आराम करना। तो आप जानते कि आपको शरीर को आराम की आवश्यकता होती है। नींद से अच्छा कोई विकल्प हो ही नहीं सकता है। अगर आप ज्यादा सोएंगे, तो काम कौन करेगा?

असल में हमें काम करते-करते अपने शरीर को आराम देना चाहिए। इसके लिए हमें योग के अभ्यास की जरूरत होती है। बहुत सारे ऐसे साधु, संत, महात्मा इत्यादि हुए हैं जो अपने जीवन में बहुत कम घंटे ही सोते थे। एक बात तय है कि आराम बड़ी चीज है तो चलिए काम करते हुए भी हम अपने शरीर को तनाव से मुक्त कर दें तो एक तरह से आराम ही मिलता है।

अक्सर लोग बाईं (right) करवट सोना पसंद करते हैं। तो वहीं कुछ लोग बाई करवट सोना ज्यादा बेहतर समझते हैं। लेकिन किस करवट सोना लाभकारी है, यह किस करवट में नींद पूरी करना चाहिए। इस बात का जवाब बहुत ही आसान है। क्षेत्र के पॉइंट से समझने की बाई करवट सोने से क्या क्या फायदे होते हैं-

सबसे अच्छा सोने का तरीका आयुर्वेद में बाई करवट बताया गया है। इस तरीके से सोने में शरीर के आंतरिक अंग अच्छे से काम करते हैं यह तरीका बेहतर होता है। 

जैसा आप जानते हैं कि दिल बाई तरफ होता है और जब बाई करवट सोते हैं तो दिल पर दबाव कम पड़ता है और आप स्वस्थ रहते हैं।

पाचन शक्ति भी मजबूत होता है अगर आप बाई तरफ करवट लेकर सोते हैं क्योंकि शरीर का वेस्ट मटेरियल आसानी से छोटी आंत से बड़ी आंत पहुंचता है।

बाई करवट सोने से गर्भवती महिलाओं को काफी फायदा होता है गर्भावस्था के इस समय बाईं करवट सोने से महिलाओं के कमर पर पड़ने वाला दबाव कम पड़ता है। गर्भाशय और भ्रूण में खून का बहाव सही ढंग से होता है।

खर्राटे कम करने के उपाय

दोस्तों आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अगर आप खर्राटे लेते हैं और बाईं करवट लेटना शुरू कर दीजिए, तो खर्राटे को आप बाय बाय कर सकते हैं। कारण साफ है कि बाई करवट सोने से जीभ और गला न्यूट्रल पोजीशन में आ जाते हैं। ऐसे में सांस की कोई दिक्कत नहीं होती है, सांस की रुकावट के कारण ही खर्राटे बजते हैं, इसलिए बाई करवट लेने से सांस आसानी से ले पाते हैं और खर्राटे बजना बंद हो जाता है।

बाईं ( left) करवट सोने से गर्दन और कमर दर्द में राहत मिलती है। अल्जाइमर नहीं होता है। गैस और सीने में जलन के प्रॉब्लम से भी छुटकारा मिलता है।

FAQ

आराम और नींद का नाता क्या है?

शरीर को अगर आप आराम देते हैं जाहिर है आपको अधिक नींद लेने की जरूरत नहीं है। अब इसका मतलब यह नहीं कि आप बैठे ही रहे काम करते हुए भी आप कर सकते हैं। सब कुछ कर रहे बिना तनाव के आराम से सो आपको साकार नहीं होगी। आपने देखा है कि आज तो लोगों की लाइफ स्टाइल तनाव में भरी है तो फिर उनको आराम कहां मिलता है। सुबह लोग पार्क में टहलते भी नजर आएंगे तो भी इतनी चिंता और तनाव में थी उनका शरीर रिलैक्स नहीं हो पाता है। तनाव में काम करना या एक्सरसाइज करना शरीर के लिए बड़ा नुकसान दायक होता है। जब आप हर काम आराम के साथ चाहे वह पढ़ना लिखना हुआ या ऑफिस का कोई काम हुआ अब बिना तलाव के आराम से करते हैं तो आपका काम भी होता है और आपके शरीर को आराम भी मिलता है।

कितने घंटे सोना चाहिए?

दोस्तों सोना/ नींद को हम घंटे में नहीं डाल सकते हैं। शरीर को आराम मिल गया तो 4 घंटे में भी पूरा नींद हो जाता है, शरीर को आराम नहीं मिला तो 12 घंटा भी सोने भी आदमी आलस एवं सुस्ती से भरा हुआ नजर आता है। तब हर किसी एक आदमी के लिए सोने की घंटे निर्धारित करना सही नहीं है।

हर शरीर की अपनी जरूरत होती है और इस सबसे आप उसे किसी पैमाने में बांध नहीं सकते हैं। ज्यादा मेहनत करते तो आपका शरीर उसी हिसाब से भोजन तय कर लेता है। लेकिन अगर यह नियम बना दिया जाए कितनी कैलोरी और इतना पानी पीना चाहिए इतना सोना चाहिए तो यह सब करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमारा शरीर खुद ही इतना सक्षम है कि हम यह नियमों के विपरीत जितना जरूरत होता उतना शरीर ग्रहण कर लेता है। 

इस बात से समझिए कि अगर आप शारीरिक  मेहनत कम करते हैं, तो आप कम भोजन करेंगे और अगर आप बहुत अधिक मेहनत करते हैं तो ज्यादा भोजन करेंगे इसलिए इसको किसी पैटर्न या नियम में माप नहीं सकते हैं। इसी तरह नींद को लेकर है अगर आप तनावमुक्त होकर काम करते तो आपको ज्यादा नींद लेने की आवश्यकता नहीं है लेकिन आप तनाव में रहते हैं तो आपके शरीर को अधिक आराम की आवश्यकता होती है इसलिए आप ज्यादा सोते हैं।

नींद क्यों अच्छी लगती है?

असल में सोना शरीर की थकान मिटाने का एक तरीका है। लेकिन अधिक नींद उसको अच्छी लगती है जो  जिंदगी की जिम्मेदारियों से बचने के लिए नींद को एक अलग तरीका मानता है। मानसिक रूप से सोने की आदत पड़ जाती है और अधिक खाना और अधिक नींद यह जीवन का हिस्सा बन जाती है।

क्या ज्यादा आना खाने से नींद अच्छी आती है?

आप देखिए कुछ लोगों की मानसिक स्थिति ऐसी बन जाती है कि जब तक वह पेट भर के ज्यादा खाना ले शरीर उनका भारी ना लगने लगे तब तक उनको नींद नहीं आती है? जब खाने के 2 घंटे के बाद ही सोना चाहिए ताकि शरीर का पाचन क्रिया बेहतर तरीके से हो सके। योग विधि में तो यह कहा गया है कि अगर आप खाना खाने के 1 घंटे के अंदर सो जाते हैं तो 80% आपका भोजन बेकार चला जाता है क्योंकि सही से पाचन नहीं होता है। इस बात पर गंभीर हो जाना चाहिए कि अगर भरपेट खाना खाने के बाद ही नींद आती है तो सोचना पड़ेगा कि नींद को लेकर या मानसिक सोच का परिणाम है। और इसे दूर करने का सबसे अच्छा उपाय योग है।

दूसरी चीज अगर आप धारणा बना लेते हैं कि आप ज्यादा खाएंगे तो अच्छी नींद आएगी तो इस गलत धारणा को छोड़ दीजिए और अपने शरीर को तय करने दीजिए कि कितना समय सोएगा। 

निष्कर्ष

कैसे सोना चाहिए और कितने घंटे सोना चाहिए, इन सब बातों पर चर्चा  किया। यह जानकारी आपके लिए बहुत ही उपयोगी साबित हुई होगी। काम करने के साथ ही शरीर को आराम देना, नींद से बचने का एक तरीका है इसलिए में बताया गया। 

जैसा कि बताया कि बाई करवट सोना चाहिए। बाईं करवट सोने से शरीर को बहुत से लाभ मिलते है।  बाईं करवट सोने से दिल को आराम मिलता है, खर्राटे भी नहीं आते हैं, इन सब बातों का जिक्र इस लेख में किया गया है। आपको यह लेख कैसा लगा, कमेंट करके हमें जरूर बताएं। 

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